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एक चील के बदलाव की कहानी जो बदल देगी आपका जीवन

आज हमारे देश में अरबों की जनसँख्या है. उनमे से कोई भी एक ऐसा इन्सान नहीं है. जो कामयाब नहीं होना चाहता, हर इन्सान चाहता है. उसके पास ढेर सारा पैसा हो, एक अच्छा घर हो, और ऐश व आराम की सब चीज़े चाहता है पर अरबो में से अधिकतर लोग ये सब पाने में कामयाब नहीं होते. क्या आपको इसके पीछे का कारण पता है?

EAGLE STORY

किसी भी इन्सान को कामयाब होने के लिए कोई बहुत बड़ा तीर नहीं मरना होता है. क्युकी मेहनत तो सब करते ही हैं. पर सिर्फ मेहनत से ही कोई कामयाब नहीं हो जाता. आप एक किसान को ही देख लीजिये. दिन भर तपती धुप में वो हल चलाता है. बहुत ज्यादा मेहनत करता है. शायद ही एक किसान से ज्यादा मेहनत कोई करता होगा. पर क्या वो कभी एक Luxury Life जी पता है? नहीं

एक किसान कभी Luxury Life नहीं जीता, क्युकी उसकी सोच ऐसी बन जाती है, की वो सिर्फ हल चलाना जानता है और कुछ उससे नहीं होगा. पर क्या वास्तव में ऐसा है? इन्सान चाहे तो कुछ भी कर सकता है. पर उसके लिए सबसे ज़रूरी है बदलाव. बदलाव इन्सान की ज़िन्दगी की कितनी अहमियत रखता है उसका अंदाज़ा आपको इस कहानी से लग जायेगा.

एक चील के बदलाव की कहानी

ये एक ऐसी कहानी है, जिसमें आपको अपनी ज़िन्दगी में बदलाव लाने की प्रेरणा मिलेगी. यह एक चील की कहानी है यह 70 साल तक जी सकता है लेकिन इस उम्र तक पहुचने के लिए चील को एक मुश्किल निर्णय लेना ही होता है. 40 साल की उम्र में इसके लम्बे और लचीले पंजे अब शिकार को नहीं पकड़ सकते, जिससे उसे खाना मिल सके. चील की लम्बी और तेज़ चोंच टेडी हो जाती है. उसके पंख पुराने मोटे और भारी बन जाते हैं मोटे और भारी पंख उसकी छाती पर अटकने लगते हैं, जिससे उसे उड़ने में परेशानी होने लगती है.

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चील अब उड़ नहीं सकती क्युकी उसके पंख अब भरी हो गए हैं , ना ही वो किसी का शिकार कर सकती क्युकी उसके पंजे और नाख़ून लम्बे हो कर मुड़ जाते हैं, साथ ही उसकी चोंच भी टेंडी हो जाती है, जिससे वो खाना नहीं खा सकती. इस तरह चील के पास अब बस 2 ही रास्ते होते हैं. मरना या दर्द से भरे बदलाव की प्रिक्रिया से होकर जाना होता है.

इस प्रिक्रिया के अनुसार चील को पहाड़ की चोटी पर उड़ कर जाना है, और घोसले में बैठना होता है. तब चील को उसकी चोंच को चट्टान पर मारना है तब तक मारना है जब तक चोंच को निकाल नहीं देता. जब उसकी चोंच टूट जाती है. तब चील को इंतज़ार करना होता है नयी चोंच के आने के लिए और तब यह अपनी चोंच से अपने पंजो को निकालेगा. और फिर नए पंजे वापस आते हैं चील अपने बूढ़े और पुराने पंखो को निकलना शुरू कर देता है.

ek cheel ke badlaw ki kahani

बदलाव के दर्द के सहने की कीमत को देना और उसके बाद वो चील अपने फिर से जन्म की प्रचलित उडान को लेता है. और 30 से ज्यादा वर्षो तक जीता है.

इस बदलाव की क्यों आवश्यकता होती है. बचने और जीने के लिए, ठीक इसी तरह हमें भी बदलाव की प्रिकिरिया को आरम्भ करना होगा. चील की तरह ही हमें भी अपनी पुराणी यादो को नकारात्मत आदतों को और अपने विचारो को निकालना, केवल पुराने बोझ से आजाद हो कर हम अपने वर्तमान का लाभ उठा सकते हैं?

एक नयी भविष्य की आगे की यात्रा को लेने के लिए तुम्हारे पुराने सीमित नकारात्मक विचारो को जाने दें. अपनी स्थिर मनोस्थिति को खोल दें. और अपने आपको फिर से एक चील की तरह उड़ने दें.

तो दोस्तों आपने देखा किस तरह एक बदलाव से चील ने अपनी बाकी की जिंदगी को मज़े से जिया. अगर आप भी अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं तो आपको भी एक सही बदलाव की ज़रूरत है. जिस तरह हमारी शिक्षा हमें कहती है की जितना बड़ा जोखिम उठाओगे उतना ही फायदा पाओगे. आज वो ज़माना आ चूका है. बिना जोखिम उठाये आप आसानी से कामयाब नहीं हो सकते.

आपको ये कहानी कैसी लगी हमें ज़रूर बताये. अपना कीमती सुझाव हमें कमेंट का ज़रिये पहुचाये. कहानी पसंद आई तो शेयर करना न भूले. ऐसी ही कहानियो के लिए पढ़ते रहे ShareThisindia.com.

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Yasir Khan Saqlaini

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